बुंदेलखंड में बदलाव ला रहा है विस्तार योजना

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तैयार किए जा रहे हैं जलवायु अनुकूल गांव

दिल्ली। अब जलवायु परिवर्तन का ख़तरा काफी बढ़ रहा है, विकासशील देशों में करीब 70 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, जहां जलवायु परिवर्तन का विशेष रूप से अधिक प्रभाव पड़ जाता है| विशेषकर जैसे जल संसाधन, कृषि, समग्र जैव विविधता, वन, तटीय क्षेत्रों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है| इसके साथ ही 700 मिलियन ग्रामीण लोग अपनी आजीविका के लिए जलवायु के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों पर निर्भर करते हैं|

जलवायु परिवर्तन विभिन्न प्रकार से कृषि को प्रभावित करता है। कृषि की उत्पादकता बढ़ाने में उपजाऊ मृदा, जल, अनुकूल वातावरण, कीट-पतंगों से बचाव आदि का महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। प्रत्येक फसल को विकसित होने के लिये एक उचित तापमान, उचित प्रकार की मृदा, वर्षा तथा आर्द्रता की आवश्यकता होती है और इनमें से किसी भी मानक में परिवर्तन होने से, फसलों की पैदावार प्रभावित होती है।

उपरोक्त के अलावा जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि क्षेत्र और भी कई तरह से प्रभावित हो सकता है, जैसे कि :

1. जलवायु परिवर्तन मृदा में होने वाली प्रक्रियाओं एवं मृदा-जल के संतुलन को प्रभावित करता है। मृदा-जल के संतुलन में अभाव आने के कारणवश सूखी मिट्टी और शुष्क होती जाएगी, जिससे सिंचाई के लिये पानी की माँग बढ़ जाएगी।

2. जलवायु परिवर्तन के जलीय-चक्रण को प्रभावित करने के परिणामस्वरूप कहीं अकाल तो कहीं बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है, जिससे फसलों को भारी तादाद में नुकसान पहुँचता है।

जलवायु परिवर्तन के प्रभावों प्राकतिक आपदाओं  जैसे सूखा ,बाढ़ ओला वृष्टि आदि के आजीविका पर होने वाले प्रभावों  को कम करने के लिए  इंडो ग्लोबल सोशल सर्विस सोसाइटी नई  दिल्ली द्वारा  जुलाई २०२० से विस्तार परियोजना का सञ्चालन  बुंदेलखंड के १५० पिछड़े गावों में किया जा रहा हे जिसमें १०००० लघु सीमांत,  अनुसूचित जाती किसानो व्  महिला चयनित किसानो  को खेती के प्राकृतिक व् कम लागत वाले तरीकों को अपनाने हेतु  प्रेरित व प्रशिक्षित किया जा रहा है। परियोजना का मुख्या उद्येश्य जलवायु अनुकूल ग्राम की संरचना है जहा प्राकृतिक संसाधन जैसे पानी, मिटटी जैविक उर्वरक का समुचित प्रबंधन किया जा सके तथा वैकल्पिक ऊर्जा के स्रोतों  बढ़ावा दिया जाये. मूल रूप से यह परियोजना  ब्लॉक कबरई ,महोबा पन्ना के अजयगढ़ ब्लॉक  व् छत्तरपुर जिले के लवकुशनगर  में संचलित की जारही है।  इसके अंतर्गत किसानो को उन्नत बीज , सिचाई के सूक्ष्म तरीको ,जल संरक्षरण ,मृदा स्वास्थय, मिश्रित खेती  ,समेकित खेती के विभिन्न मॉडल  सोलर पंप,उन्नत चूल्हे आदि किसानो को प्रदर्शन हेतु उपलभ्ध कराये जा रहे है ताकि उनसे प्रेरित होकर अन्य किसान भी जलवायु अनुकूल कृषि के तरीको का अनुपालन करें।  परियोजना समन्वयक श्री विनीत निगम ने बुंदेलखंड न्यूज़ से वार्ता के दौरान बताया की बुंदेलखंड में जलवायु परिवर्तन के कुप्रभाव की अधिकता को देखते हुए यह तय किया गया इस क्षेत्र में हम लगातार हम दिशा में सहयोगी संस्थाओ व् सरकार  की मदद से  आगे भी इसी मुद्दे पर कार्य करेंगे। विस्तार परियोजना के माध्यम से किसानो को सरकारी योजनाओ का बेहतर लाभ  प्राप्त हो रहा है  जिसमे कृषि , बागवानी ,पंचायत विभाग के प्रतिनिधि ग्राम स्तरीय जलवायु  आधारित कार्य योजना बनाने में सहभागिता  सुनिश्चित की गई। इस परियोजना की कार्यशैली को विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा सराहा जा रहा है। विस्तार परियोजना में ग्रासलैंड अनुसंधान केंद्र, भारतीय कृषि वानिकी केंद्र , कृषि विज्ञान केंद्र से तकनीकी सहयोग प्राप्त किया जा रहा है।

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